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शक्ति की बर्बरता

शक्ति की बर्बरता

खाकी वर्दी देह का गौरव है जो प्रतीक है सुरक्षा का

समाज पर पहरा जैसे चंद्र लगाएं चक्कर पृथ्वी की कक्षा का

बचपन से जाना बुराई पर अच्छाई का प्रतीक खाकी है

आम जनता की आस है कि पुलिस जांच बाकी है

खाकी वर्दी को पास पाकर हर भय दूर हो जाता है

पर उस मासूम की निडरता को यही भय सताता है

मेले में बाबुल से बिछड़ी गुड़िया हवाले हुई हैवान के

हैवान खाकी वर्दी में जिन्हें वो रूप समझी भगवान के

मासूम को अब कभी पुलिस में रक्षक नज़र नहीं आएगा

खाकी वर्दी को शर्मसार करके तू नर्क भी नहीं पाएगा

अन्याय से लड़ने के मार्ग का पहला पड़ाव है थाना

पर वही बन गया बेगुनाह इंसानों के लिए कसाईखाना

पिता पुत्र की मृत्यु प्रमाण है बेज़ुबान जीव की हत्या का

हत्या खाकी शक्ति को ज़िम्मेदारी से निभाने के मिथ्या का

अत्याचार हुए हज़ारों पर गरीबों को उम्मीद रही खाकी के रखवालों से

हिस्सा हक का मांगा तो मासूम खून बहा मांजोलाई के प्यालों से

ज़मीन किसान की हड़पकर जो बाहुबली मालामाल हो गया

थाने के चक्कर लगाते लगाते हर ग्रामवासी बेहाल हो गया

अर्ज़ी हज़ार मजबूरों की नाकाफी थी खाकी के न्याय के तुला पर

शांत गांव की पीड़ा दूर की खाकी ने फोर्ब्सगंज में गोलियां चलाकर

नस्लभेद, जातिवाद पर कितनी ही लड़ाइयां समाज में जारी हैं

पर मुथंगा आदिवासी संहार, हाशिमपुरा दंगों में लड़ाई हमने हारी है

जहां खाकी को निष्पक्ष सुलह कराकर होना था कर्त्तव्य परायण

वहां चंद खाकी वर्दी धारियों ने किया इंसानियत से पलायन

कितने ही बेसहारा मजबूर अपने हकों को मांगते रह गए

पान सिंह, मान्या सुर्वे जैसे कई सुधरते पर गोलियां सह गए

कुछ चंद गद्दारों के कारण पूरी खाकी वर्दी पर सवाल है

इनके कारनामों से संपूर्ण समाज में खाकी की भूमिका पर बवाल है

अशोक, विजय जैसे कई सपूत वर्दी की शान बढ़ाते हैं

कई शहीद भारत मां की आन पर न्यौछावर होकर भी मुस्कुराते हैं

शक्ति रक्षा के लिए थी पर ना जाने कैसे शक्ति बर्बरता हो गई

चर्चे होने थे इनके बलिदान के पर मुख्य समाचार इनकी क्रूरता हो गई


- ईशित्व सिंह


Garima Sharma
Very well written Eshitva, keep it up
Aditya
Very good eshitva .
Sayantee Sarkar
Loved it Eshitva❤
MANISH KUMAR SHUKLA
बहुत ही अच्छी कविता ईशित्व...
Eshitva Singh
Thanks everyone for your valuable comments. It means a lot.