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एम.एस.एम.ई.

भारत में अगर खेती अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तो सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम उसके मजबूत कदम हैं। यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का कार्य करते हैं। यह उद्योग कृषि के बाद रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। 

इन उद्योगों को तीन स्तरों सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्योगों में बांटा जाता है। यह उद्योग हस्तशिल्प ग्रामोद्योग से शुरू होकर वस्त्र परिधान,  खाद उत्पाद,  ऑटो कलपुर्जे के उत्पाद,  लकड़ी प्लास्टिक के खिलौने,  इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कई तरह की सेवाओं से जुड़े हैं।

एम.एस.एम.ई. की नयी परिभाषा --

 सरकार ने नए बदलते स्वरूप को देखते हुए एम.एस.एम.ई. का दायरा विस्तृत किया जीससे अधिक उद्योगों को एम.एस.एम.ई. के फायदे प्राप्त हो। इसको तीन स्तर में विभाजित किया है—

सूक्ष्म उद्योग-- जिस उद्योगों में निवेश एक करोड़ से कम एवं सालाना टर्नओवर पांच करोड़ से कम है उन्हें सूक्ष्म उद्योग कहा जाता है।

लघु उद्योग— जिस उद्योगों  में निवेश दस करोड़ से कम एवं टर्नओवर पचास करोड़ से कम है उन्हें लघु उद्योग कहा जाता है।

मध्यम उद्योग-- जिस उद्योगों में निवेश पचास करोड़ से कम एवं टर्नओवर ढाई सौ करोड़ से कम है उन्हें मध्यम उद्योग कहा जाता है।

वर्तमान में एम.एस.एम.ई. के तहत लगभग 99.5% उद्यम ‘सूक्ष्म’ श्रेणी के हैं सूक्ष्म उद्यमों से आशय सामान्यतः उन छोटे उद्यमों से है जिनका संचालन एक व्यक्ति (महिला अथवा पुरुष)  द्वारा अपने घर से किया जाता है। देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की संख्या समान है परंतु लघु और मध्यम श्रेणी से अधिकांश उद्यम शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। 

एम.एस.एम.ई. के अंतर्गत मिलने वाले फायदे –


एम.एस.एम.ई. रजिस्ट्रेशन के बाद आपको आसानी से लोन मिल सकेगा वह भी कम ब्याज पर, जैसे मुद्रा स्कीम (MUDRA ) के तहत आसानी से लोन मिल सकेगा।

एम.एस.एम.ई. के पंजीकरण के बाद आपकी कोस्ट कम हो जाएगी क्योंकि विभिन्न योजनाएं हैं जो निर्माता को सब्सिडी प्रदान करती हैं|  जीएसटी में भी छूट दी जा रही है और आपको कई सारे टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगें।

आसान कर व्यवस्था, कर में रियायतें, सिंगल विंडो क्लीयरेंस,  औद्योगिक लाइसेंस, ऑनलाइन क्लीयरेंस, आदि कई सारे टेंडर जो सरकार द्वारा निकाले जाते हैं उसमें एमएसएमई को प्राथमिकता दी जाती है।

कुछ आंकड़े -

वित्तीय वर्ष 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार, एम.एस.एम.ई.  के तहत भारत में लगभग 6.34% उद्यम सक्रिय हैं। इनमें से अधिकांश (लगभग 51%)  देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

जीडीपी में लगभग 8% के योगदान के साथ-साथ क्षेत्र में लगातार 10% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर को बनाए रखा है।

एम.एस.एम.ई. भारत के कुल निर्यात में करीब 45% योगदान देते हैं|

चुनौतियों का सामना -

एमएसएमई क्षेत्र में वित्तपोषण की कमी इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है| वर्ष 2018 में जारी अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एम.एस.एम.ई.  क्षेत्र को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली द्वारा एम.एस.एम.ई. की कुल आवश्यकता का एक तिहाई (लगभग 11 लाख करोड़) से कम ही ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

अथार्थ एम.एस.एम.ई. को अधिकांश ऋण अनौपचारिक स्रोतों से प्राप्त होता है, यही कारण है की भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एम.एस.एम.ई.  क्षेत्र में तरलता बढ़ाने के प्रयासों के परिणाम बहुत ही सीमित होते हैं।

विद्युत, सड़क, जल, परिवहन, संचार, सूचना और तकनीकी आगतों जैसी विश्वसनीय एवं कुशल बुनियादी सुविधाओं का अभाव, प्रबंधन की समस्या, वित्त की अनुपलब्धता, कुशल श्रमिकों  का अभाव, बाजार का अल्प ज्ञान जैसी समस्या।

 बड़े संगठनों की तरह कुशल एवं सक्षम श्रमबल को नियुक्त करने की स्थिति में नहीं। बड़ी कंपनियों की तुलना मैं प्रचार प्रसार ब्रांडिंग का अभाव।

संकटग्रस्त हालात में सरकार के जरूरी कदम —

COVID -19 एवं अन्य कारणों से उत्पन्न व्यवस्था को देखते हुए भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था में एम.एस.एम.ई. क्षेत्रों में योगदान, संभावना और भविष्य के अवसरों को मद्देनजर इस क्षेत्र के लिए अनेक नीतिगत फैसले की शुरुआत की है-

v एम.एस.एम.ई. को दी गई तीन लाख करोड़ की बड़ी कॉलेटरल मुक्त सहायता होने पर, अपने कार्यों को पुनः संचालित करने में मदद करेगी।

v सरकार ने पूरी राशि के लिए एक संप्रभु ऋण गारंटी (सॉवरेन क्रेडिट गारंटी) देकर बेहतर कदम उठाया है क्योंकि बैंक उधारकर्ताओं को सहायता प्रदान करने के लिए अनिएछुक  हो सकते हैं।

v 20,000 करोड़ रुपए का आंशिक रूप से गारंटीकृत अधीनस्थ ऋण कार्यक्रम और 50,000 करोड़ की निधि योजना एम.एस.एम.ई. के वित्त पर इक्विटी हिस्से को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

 एम.एस.एम.ई. के विकास की बढ़ोतरी के लिए उपाय—

क्षेत्रीय असंतुलन पर नियंत्रण - ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिकरण में भी बढ़ावा मिलेगा इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा एवं रोजगार के लिए गांव से शहरों की ओर पलायन की समस्या से भी निजात मिलेगा|

 स्कीम का विस्तार-- सरकार की मुद्रा योजना, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं का विस्तार करना एवं सभी की पहुंच तक उपलब्ध कराया जाए|

SFURTI -- एमएसएमई मंत्रालय द्वारा क्लस्टर विकास को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक उद्योग स्पूर्ति के उत्थान के लिए फंड की योजना।

सरकार को तीनों आधारों को सुधारों के लिए सुनिश्चित करना होगा।

वर्तमान आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में एम.एस.एम.ई. क्षेत्रों की ओर सभी की निगाहें हैं| यह क्षेत्र न केवल रोजगार बल्कि क्षेत्रीय औद्योगिक संरचना में महत्वपूर्ण है| जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट के तहत उच्च निर्माण गुणवत्ता युक्त निर्माण कर विश्व बाजार तक पहुँच सुनिश्चित कर सकते हैं।