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खाद्यान्न की अनुपलब्धता

‘रोटी, कपड़ा और मकान, इन्हीं जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा इंसान ‘

देश अपनी विकास एव उपलब्धियों के कीर्तिमान रच रहे हैं और मूलभूत समस्याओं के आँकड़े चिंताजनक हैं। ‘भोजन के अधिकार ‘ सभी को उपलब्ध होना चाहिये। प्रत्येक मानव जीवन के निर्वाह के लिये आवाश्यक है । आजादी के इतने वर्ष बाद एवं सरकार के नीति एवं योजना के बाद भी भोजन की अनुपलब्ध्ता एव भुखमरी जैसी समस्याएँ से ग्रसित हैं। 

भुखमरी से हमारा आशय भोजन की अनुपलब्धता से होता है। किंतु खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) प्रतिदिन 1800 किलो कैलोरी से कम ग्रहण करने वाले लोगों को भुखमरी का शिकार मानता है। 

चिंताजनक आँकड़े दर्शाते हैं – 

1. आँकड़ों की रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व में 1.3 बिलियन टन भोजन किन्हीं कारणों से बर्बाद हो जाता है ।

2. यह मात्रा मानव उपयोग के लिये तैयार किये गये कुल भोजन का एक-तिहाई है।

3. दुनिया मे सात लोगो में एक को हर रोज भूखे पेट सोना पड़ता है। भारत में यह आँकड़ा 19.4 करोड़ है।

4. दुनिया में 870 मिलियन लोग कुपोषण के शिकार हैं 

5. स्वयं कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट कहती हैं कि भारत में लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए का अन्न बर्बाद हो जाता है। 

6. भुखमरी सूचकांक (GHI) के अनुसार 2019 में 117 देशों की सूची में भारत 102 वें स्थान पर हैं।

इन सब आँकड़ों को देखने के बाद खाद्यान्न के प्रति सम्वेद्ना एवं भोजन की बर्बादी को उजागर करता है। सरकार की योजनाओं के किर्यांवयन में असफलता दिखाई देती है। खाद्य सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने और समाज के गरीब से गरीब तबके तक अनाज पहुँचाने के उद्देश्य से बेह्तर कदम उठाने कारण- 

1. खाद्यान्न  के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव ।

2. योजनाओं को लागू करने में कन्ही न कन्ही भारी गड़बड़ी एवं अनियमितता हैं। खाद्य व्यवसाय से सम्भंधित लोगों में प्रशिक्षण (Training) की कमी।

3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और मिड डे मील योजना जैसे कार्यक्रम आज भी लोगों की पहुँच से दूर हैं।

4. शादी पार्टी एवं अन्य सार्वजनिक समारोहों में फिज़ूलखर्ची एवं दिखावे की बढ़ती मानसिकता| इसमें बने भोजन का एक तिहाई से अधिक बर्बाद होनासुझाव –

1. भोजन कि बर्बादी को कम करने को कम करने के लिए सरकार कानून बनाए। जिसके अंतर्गत कंपनियों एवं लोगों के द्वारा भोजन बर्बाद करने पर दंडित किया जा सके। 

2. सामाजिक संगठन एवं सरकार लोगों को जागरूक करें।  

3. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेफ्रिजरेशन (International Institute of Refrigeration) के अनुसार, यदि विकासशील देशों के पास विकसित देशों के समान ही शीत-गृहों (Cold Storage) की उपलब्धता हो तो वे अपने खाद्यान्न को बर्बाद होने से बचा सकेंगे।

4. भंडारण क्षमता एवं शीत-गृहों को दुरुश्त किया जाएँ , जिससे अनाज को सुरक्षित रखा जा सके।

5. वितरण प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, इसमें समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाए। 

6. इन सब नीति योजनाओं का पुनः विश्लेषण किया जाए। 

7. सरकार की वर्तमान “एक देश, एक राशन” के माध्यम से देश में किसी भी शेत्र में प्रवासी मज़दूरों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध करने मे सहायता प्राप्त होगी।‘एक मुहिम’ 

“दाने दाने पर लिखना है खाने वाले का नाम”

यह एक मिथक है कि दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम/ अगर ये सत्य होता तो हमारे देश मे 40 प्रतिशत अन्न की बर्बादी क्यों ?सामाजिक संगठनों के माध्यम से भूखे पेट तक भोजन की उपलब्धता की राह में सहयोग किया जा सकता है। “ मज़दूरों एवं राहों के किनारे बैठे झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे गरीबों को, अन्य जरूरतमंदो को जिन्हें एक वक्त की रोटी भी प्राप्त करने में असफल हैं । वहाँ तक भोजन की पहुँच हो सके जिससे भोजन की बर्बादी एवं भूखे पेट दोनों के लिए कल्याणकारी हो। “तरीके – 

1. लोगों को भोजन के प्रति सम्वेदना प्रकट की जाए एवं जागरुक किया जाए कि भोजन की बर्बादी न करें। जरूरतमंदो का ख्याल रखें एवं नैतिक कर्तव्यों का पालन करें।

2. गली – गली एवं चौराहे पर स्वच्छ तीन प्रकार के डिब्बे रखें जाएँ। इनकी पहुंच घरों से दूर न हो। 

3. लोगों से अपील की जाए कि खाना खाने के बाद जो स्वच्छ खाना बच जाता है, उसे उन डिब्बों में रख आयें।

4. रात का बचा हुआ भोजन सुबह किसी कूडेदान या कहीं फेंक दिया जाता है। इससे अच्छा है नागरिक आगे आए और वह भोजन भूखे पेट तक उपलब्ध कराया जा सके। 

5. स्वयंसेवक (volunteer) के माध्यम से उन डिब्बों में रखे भोजन को इकट्ठा करे एवं चिन्हित बस्तियों एवं जरूरतमंदो को पहुँचाया जाए। 

6. टोल फ्री नं जेसी सुविधाओं को जारी किया जाए, जिससे शादी, सार्वजनिक समारोह, होटल रेस्तरां में लोग इछानुसार सूचित कर जानकारी दें। 

भोजन की बर्बादी पर भी प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी हो गया है। सरकार एवं अन्य संगठनों द्वारा लागू की जा रही समाज कल्याण योजनाओं को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है, ताकि समाज के आर्थिक रूप से एवं वंचित कमजोर वर्ग को लगातार खाद्य सुरक्षा का लाभ मिलता रहे।


हो


Eshitva Singh
Amazing!!