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स्वतंत्रता - एक अनमोल सौगात

स्वतंत्रता - एक अनमोल सौगात

स्वतंत्रता एक भावना है जो शब्दों से परे है

इसीलिए आज हम इस दृढ़ आत्मविश्वास से भरे हैं

कि कल कोई त्यौहार जलियांवाला बाग नहीं होगा

बाग और कुंओं में बेगुनाह खून का दाग नहीं होगा

कोई एक औरत की ममता का अधिकार नहीं छीनेगा

किसी दत्तक दामोदर से उसकी मां का प्यार नहीं छीनेगा

मानव रचित भुखमरी बंगाल का अकाल अब हमें नहीं रुलाएगा

बंगलों में शाही दावत सड़कों पर लाखों लाशें नहीं बिछाएगा

कोई कानून रौलेट एक्ट सा बर्बरता का प्रतीक नहीं बनेगा

अश्वेत वर्ण पर दासता और वैश्यावृत्ति का मुहर नहीं लगेगा

देशभक्त और सेनानी फांसी के तख्तों पर नहीं झूलेंगे

किसान अपनी ज़मीन पर अफ़ीम की खेती नहीं कबूलेंगे

यह स्वतंत्रता कितनी ही कुर्बानियों का परिणाम है

74 वर्षों में भी तो कितने ही स्वतंत्रता संग्राम है

सती प्रथा की बेड़ियों से मुक्ति समाज ने पाई है

महिलाएं पुरुषों के साथ सर्वत्र बराबरी पर आई हैं

तीन अल्फ़ाज़ से अब किसी का घर नहीं टूटेगा

कोई ससुराल अब मायके को दहेज के नाम पर नहीं लूटेगा

मानवाधिकार अब हर देशवासी के लिए सुरक्षित हैं

दिव्यांग जन के अधिकार हर ओहदे के लिए आरक्षित हैं

सरकार से सवाल करना हमारा संवैधानिक अधिकार है

समलैंगिकता कानूनी तौर पर देश में स्वीकार है

जाति प्रथा और रंगभेद को हम भारत से मिटा रहे हैं

हम सोने की चिड़िया को मोतियों से सजा रहे हैं

स्वतंत्रता एक भारी शब्द और महान इतिहास है

स्वतंत्रता इस देश की मिट्टी का खूबसूरत एहसास है

भारत एक स्वतंत्र देश बना अनेकों बलिदानों से

स्वतंत्रता संग्राम लड़ा है यह देश कई ज़मानों से

हमारा ध्वज विजय पताका सा आकाश में जगमगाता है

कई शहीदों की सांसों से यह उन्मुक्त गगन में लहराता है

यह स्वतंत्रता हमारे जीवन में यूं ही नहीं आई है

भारत मां के सपूतों ने इसके लिए जान की बाज़ी लगाई है


- ईशित्व सिंह



Sayantee Sarkar
Loved it Eshitva❤